- प्रेरणा स्पेशल स्कूल के बच्चों को मिला स्वरोजगार का व्यावहारिक मंच, भोजन तैयार करने से लेकर ग्राहकों से व्यवहार और हिसाब-किताब तक सीखेंगे हुनर
- छावनी परिषद कार्यालय परिसर में शुरू हुआ बच्चों द्वारा संचालित फूड कार्ट, सीईओ पी.डी. स्टीफन ने कहा—आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है यह पहल
कानपुर, 19 सितंबर।
प्रेरणा स्पेशल स्कूल के विशेष बच्चों और खिलाड़ियों के सपनों को आत्मनिर्भरता की दिशा में नई उड़ान देते हुए छावनी परिषद कार्यालय परिसर में बच्चों द्वारा संचालित फूड कार्ट का शुभारंभ किया गया। इस पहल का उद्देश्य विशेष बच्चों को व्यावहारिक कौशल का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है।
फूड कार्ट का उद्घाटन छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी पी.डी. स्टीफन, नामित सदस्य लखन लाल ओमर, प्रशासनिक अधिकारी वंदना सिन्हा, समाजसेवी श्रुति कुमार शर्मा सपरिवार, प्रधानाचार्या डॉ. शिखा अग्रवाल, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सुब्रतो भद्रा, अतुल शुक्ला, नीता सामवेदी एवं खेल प्रशिक्षक सत्येंद्र सिंह यादव ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। इस अवसर पर छावनी परिषद के सभी सदस्य मौजूद रहे। बच्चों ने तालियों के साथ अतिथियों का स्वागत किया।
आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है फूड कार्ट
मुख्य अधिशासी अधिकारी पी.डी. स्टीफन ने कहा कि यह फूड कार्ट केवल व्यवसाय का माध्यम नहीं है, बल्कि विशेष बच्चों के आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बच्चों को अपनी क्षमता और मेहनत के आधार पर समाज में अलग पहचान बनाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल बच्चों के भविष्य को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
नामित सदस्य लखन लाल ओमर ने कहा कि छावनी परिषद दिव्यांग बच्चों के कौशल विकास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे और भविष्य में भी इस प्रकार की पहल जारी रखी जाएगी।
व्यावहारिक प्रशिक्षण से मिलेगा स्वरोजगार का अनुभव
प्रधानाचार्या डॉ. शिखा अग्रवाल ने बताया कि फूड कार्ट बच्चों के लिए केवल खाद्य सामग्री बेचने का माध्यम नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक प्रशिक्षण केंद्र की तरह काम करेगा। बच्चे यहां भोजन तैयार करने, खाद्य पदार्थों की प्रस्तुति, साफ-सफाई, ग्राहकों से संवाद, ऑर्डर लेने, हिसाब-किताब रखने और दैनिक संचालन जैसे विभिन्न कार्य सीखेंगे।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार का प्रशिक्षण बच्चों में जिम्मेदारी की भावना, आत्मविश्वास और कार्यकुशलता विकसित करने में मदद करेगा। इससे उन्हें भविष्य में अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुसार स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।
यह पहल विशेष बच्चों के लिए समान अवसर, कौशल विकास और सम्मानजनक आजीविका की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।