राष्ट्रीय खेल दिवस पर ‘एक घंटा खेल के नाम’ से गूंजा महिला महाविद्यालय

 

 

  • खेल भावना, फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली का दिया संदेश, विद्यार्थियों ने उत्साह से लिया विभिन्न खेलों में हिस्सा
  •  ‘मोबाइल बनाम खेल का मैदान’ नुक्कड़ नाटक ने बढ़ती मोबाइल निर्भरता पर किया प्रहार, शारीरिक दक्षता परीक्षण में विद्यार्थियों ने दिखाया दमखम

 

कानपुर, 29 अगस्त।

राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर महिला महाविद्यालय पी.जी. कॉलेज, किदवई नगर में शनिवार को शारीरिक शिक्षा विभाग की ओर से ‘एक घंटा खेल के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में खेल भावना, शारीरिक स्वास्थ्य, अनुशासन, टीम भावना और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर प्रतिभा श्रीवास्तव ने हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। उन्होंने अपने संबोधन में खेलों को शारीरिक शिक्षा का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि खेल विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित खेल गतिविधियां विद्यार्थियों को स्वस्थ रखने के साथ उनमें अनुशासन और सकारात्मक सोच का भी विकास करती हैं।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न खेलों एवं शारीरिक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों की शारीरिक क्षमता और फिटनेस स्तर का आकलन करने के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षण भी आयोजित किया गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले एवं विजेता विद्यार्थियों को पदक और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इससे विद्यार्थियों को सक्रिय एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिला।

मोबाइल की बढ़ती लत पर नुक्कड़ नाटक से संदेश

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण शारीरिक शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक ‘मोबाइल बनाम खेल का मैदान’ रहा। प्रभावशाली और मनोरंजक प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने मोबाइल फोन पर बढ़ती निर्भरता को उजागर करते हुए बाहरी खेलों और शारीरिक गतिविधियों की आवश्यकता पर जोर दिया। नाटक के जरिए संदेश दिया गया कि शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और संतुलित जीवनशैली के लिए खेलों में नियमित सहभागिता जरूरी है।

इस अवसर पर प्रोफेसर दीपाली निगम, विभागाध्यक्षा एवं संयोजिका, खेल समिति ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए खेलों को उनके सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि खेलों में सहभागिता से विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और सहयोग की भावना विकसित होती है।

डॉ. नम्रता पांडे, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी ने भी कार्यक्रम के सफल आयोजन में सक्रिय सहयोग दिया। कार्यक्रम के आयोजन में शारीरिक शिक्षा विभाग एवं खेल समिति की सदस्य डॉ. दीपाली श्रीवास्तव, डॉ. पूजा श्रीवास्तव और डॉ. पारुल अवस्थी के प्रयास महत्वपूर्ण रहे। महाविद्यालय की डॉ. शोभना द्विवेदी सहित अन्य शिक्षकगण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने भी कार्यक्रम में सहयोग प्रदान किया।

समापन अवसर पर प्रोफेसर दीपाली निगम ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। ‘एक घंटा खेल के नाम’ कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को खेलों से जुड़ने, फिटनेस को जीवनशैली का हिस्सा बनाने और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बचने का संदेश दिया। शारीरिक दक्षता परीक्षण, सम्मान समारोह और नुक्कड़ नाटक ने कार्यक्रम को विशेष रूप से प्रभावी बनाया।

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