खेलों से होता है मस्तिष्क का विकास — प्रो. डॉ. दीपिका शुक्ला

 

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  • नियमित शारीरिक गतिविधियाँ बढ़ाती हैं सीखने की क्षमता

 

 

कानपुर, 28 नवंबर।

शिक्षा और खेल जगत का हमेशा से गहरा संबंध रहा है। खेल न केवल बच्चों के शारीरिक विकास में मदद करते हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। महाराणा प्रताप डेंटल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला का कहना है कि नियमित शारीरिक गतिविधियाँ मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस (सीखने और याददाश्त वाले हिस्से) के विकास को बढ़ावा देती हैं। इससे छात्रों की पढ़ाई में एकाग्रता, समझ और परिणाम बेहतर होते हैं। अध्ययनों के अनुसार, जो छात्र खेलों में सक्रिय रहते हैं, वे परीक्षाओं में भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

उन्होंने बताया कि खेलों से बच्चों में अनुशासन, सहयोग और सहानुभूति की भावना विकसित होती है। टीम में खेलना उन्हें नेतृत्व कौशल और सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। इसके अलावा, खेल मानसिक तनाव कम करते हैं और एक स्वस्थ मानसिकता विकसित करते हैं।

डॉ. शुक्ला के अनुसार, खेल बच्चों को समय प्रबंधन, लक्ष्य निर्धारण और उसे पूरा करने के कौशल भी सिखाते हैं। साथ ही, खेल शिक्षा में करियर के नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे छात्रों को खेल प्रबंधन, फिटनेस, कोचिंग और विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर रोजगार संभावनाएँ मिल रही हैं।

खेलों से बनती है सकारात्मक सोच

बच्चों में हार-जीत को सही तरीके से स्वीकारने की क्षमता विकसित

आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान में होता है इज़ाफ़ा

पढ़ाई में आता है सुधार

खेलों से मन तरोताज़ा रहता है

कक्षा में एकाग्रता और समझने की क्षमता बढ़ती है

अनुशासन और टीमवर्क की सीख

टीम के साथ मिलजुलकर काम करने की आदत

नेतृत्व क्षमता को मिलता है बढ़ावा

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