कबड्डी टीम चयन में खेल विभाग की मनमानी, प्रतियोगिता से पहले ही घोषित कर दी टीम

 

 

  •  जिला कबड्डी संघ को 4 नवंबर को प्रतियोगिता और चयन कराने का भेजा था पत्र, लेकिन 2 नवंबर को ही टीम घोषित करने का आरोप
  • संघ को अंधेरे में रखकर मुक्केबाजी और जूडो के अंशकालिक प्रशिक्षकों से करा लिया कबड्डी खिलाड़ियों का ट्रायल, 30 से अधिक खिलाड़ियों ने डीएम से लगाई निष्पक्ष चयन की गुहार

भूपेंद्र।

कानपुर, 4 नवंबर। खिलाड़ियों को निष्पक्ष अवसर देने और खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालने वाले खेल विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला कबड्डी टीम के चयन में कथित मनमानी और नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। आरोप है कि विभाग ने जिला कबड्डी संघ को पत्र भेजकर चार नवंबर को प्रतियोगिता आयोजित कराने और उसी दिन टीम चयन की सूचना दी थी, लेकिन इससे दो दिन पहले ही दो नवंबर को टीम घोषित कर दी गई। ऐसे में चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।

संघ को जानकारी दिए बिना कराया ट्रायल

मामले को और गंभीर बनाते हुए आरोप लगाया गया है कि खेल विभाग ने जिला कबड्डी संघ को बिना जानकारी दिए मुक्केबाजी और जूडो के अंशकालिक प्रशिक्षकों से कबड्डी खिलाड़ियों का ट्रायल करा लिया। संबंधित खेल के प्रशिक्षकों और संघ की भूमिका को दरकिनार कर की गई इस प्रक्रिया ने विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि जब चयन की तारीख पहले से निर्धारित थी तो गुपचुप तरीके से ट्रायल कराने और टीम घोषित करने की जरूरत क्यों पड़ी?

ग्रीन पार्क पहुंचे 30 से अधिक खिलाड़ी, नहीं हुई प्रतियोगिता

बुधवार को जिला कबड्डी संघ के बुलावे पर 30 से अधिक खिलाड़ी ग्रीन पार्क स्टेडियम पहुंचे। खिलाड़ियों को उम्मीद थी कि प्रतियोगिता के माध्यम से उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने और टीम में जगह बनाने का अवसर मिलेगा, लेकिन मैदान पर न तो प्रतियोगिता आयोजित हुई और न ही चयन प्रक्रिया आगे बढ़ी। पहले से टीम घोषित किए जाने की जानकारी मिलने पर खिलाड़ियों में नाराजगी फैल गई। खुद को चयन प्रक्रिया से वंचित महसूस कर रहे खिलाड़ियों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर पूरे मामले की शिकायत की और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

प्रभारी क्रीड़ा अधिकारी ने नहीं दिया जवाब

वहीं, मामले पर प्रभारी क्रीड़ा अधिकारी कर्मवीर सिंह यादव से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वह आरोपों पर जवाब देने से बचते नजर आए। दूसरी ओर, जिला कबड्डी संघ के उपाध्यक्ष संतोष बग्गड़ ने खेल विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगातार नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विभाग की मनमानी का खामियाजा उन खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है, जो महीनों तक अभ्यास कर अपनी प्रतिभा साबित करने की तैयारी करते हैं।

चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल, जांच का इंतजार

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब चार नवंबर को प्रतियोगिता और चयन प्रस्तावित था तो दो नवंबर को टीम किस आधार पर घोषित कर दी गई? क्या चयन प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली गई थी और प्रतियोगिता केवल औपचारिकता बनकर रह गई थी? अब जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत पहुंचने के बाद खिलाड़ियों को निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का इंतजार है।

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