1936 ओलंपिक हॉकी स्वर्णिम गाथा को 90 वर्ष: मेजर ध्यानचंद और भारतीय टीम को विशेष श्रद्धांजलि

 

 

  • केरल के खेल इतिहासकार प्रो. वशिष्ठ ने प्रकाशित की स्मारिका, 1936 के स्वर्णिम नायकों को किया नमन, विश्व कप के लिए भारतीय टीम को दी शुभकामनाएं
  • भारत की ऐतिहासिक जीत को समर्पित विशेष प्रकाशन

 

बर्लिन ओलंपिक-1936 में भारतीय हॉकी टीम की ऐतिहासिक स्वर्णिम जीत के 90 वर्ष पूरे होने के अवसर पर केरल के खेल इतिहासकार प्रो. वशिष्ठ ने एक विशेष स्मारिका प्रकाशित की है। यह स्मारिका भारतीय हॉकी के उन महान खिलाड़ियों को श्रद्धांजलि अर्पित करती है, जिन्होंने दुनिया के सबसे बड़े खेल मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया था।

मेजर ध्यानचंद की कप्तानी में रचा था इतिहास

वर्ष 1936 के बर्लिन ओलंपिक में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की अगुवाई में भारतीय टीम ने मेजबान जर्मनी को 8-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता था। इस मुकाबले में मेजर ध्यानचंद ने तीन शानदार गोल दागे थे। यह ऐतिहासिक जीत जर्मनी के तत्कालीन शासक एडोल्फ हिटलर की मौजूदगी में दर्ज हुई थी और इसे भारतीय खेल इतिहास की सबसे महान उपलब्धियों में गिना जाता है।

90वीं वर्षगांठ पर वीर खिलाड़ियों को नमन

प्रो. वशिष्ठ द्वारा प्रकाशित इस विशेष पुस्तिका में 1936 की स्वर्णिम टीम के सभी खिलाड़ियों के योगदान को याद किया गया है। साथ ही उस ऐतिहासिक विजय के महत्व और भारतीय हॉकी की गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

विश्व कप के लिए भारतीय टीम को शुभकामनाएं

इस स्मारिका के माध्यम से आगामी हॉकी विश्व कप में भाग लेने वाली भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम को भी शुभकामनाएं दी गई हैं। प्रो. वशिष्ठ ने उम्मीद जताई है कि भारतीय टीमें एक बार फिर विश्व मंच पर देश का नाम रोशन करेंगी और गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएंगी।

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