- सुपीरियर स्पिरिट्स स्पोर्ट्स एकेडमी के 20 वर्षीय गेंदबाज निष्कर्ष श्रीवास्तव दोनों हाथों से गेंदबाजी में हैं माहिर
कानपुर, 4 फरवरी।
दोनों हाथों से लिखने वाला, दोनों हाथों से खाने वाला तो आपने बहुत सुना होगा, लेकिन दोनों हाथों से गेंदबाज़ी करने वाला खिलाड़ी शायद न सुना हो। कानपुर के साउथ ग्राउंड पर जब एक युवा गेंदबाज ने पहले लेफ्ट आर्म स्पिन से बल्लेबाज को छकाया और अगली ही गेंद पर राइट आर्म ऑफ ब्रेक से चाल चली, तो दर्शक चौंक गए। स्कोरबोर्ड नहीं, हाथ बदलता गेंदबाज सबका ध्यान खींच रहा था।
नाम है निष्कर्ष श्रीवास्तव। वाराणसी के रहने वाले 20 वर्षीय निष्कर्ष सुपीरियर स्पिरिट्स स्पोर्ट्स एकेडमी से खेलते हैं। वह मूल रूप से लेफ्ट आर्म स्पिनर है, लेकिन जरूरत पड़े तो दाएं हाथ से ऑफ ब्रेक भी उसी सटीकता से डाल देता है। यह कोई दिखावटी प्रयोग नहीं, बल्कि मैच सिचुएशन के हिसाब से अपनाई गई रणनीति है। निष्कर्ष इस अनोखी कला को एनआईएस कोच प्रमोद पाटिल की देखरेख में ए.एस. क्रिकेट एकेडमी में लगातार निखार रहा है।
फिजिकल से फोकस तक, पूरी तैयारी
निष्कर्ष की फिटनेस पर खास ध्यान देती हैं फिजिकल कोच पूजा पाटिल। लंबी स्पेल, हाथ बदलकर गेंदबाज़ी और कंट्रोल यह सब बिना मजबूत फिटनेस संभव नहीं। मैदान पर उसकी लय बताती है कि यह प्रयोग नहीं, प्रैक्टिस का नतीजा है।
घर से मिला अनुशासन
निष्कर्ष के पिता श्री विनय कुमार श्रीवास्तव, वाराणसी स्थित जे.एन.एम. कॉलेज फॉर एडवांस स्टडीज एंड टेक्नोलॉजी के प्राचार्य हैं। घर का माहौल अनुशासन और पढ़ाई का रहा, और मैदान पर वही अनुशासन उसकी गेंदों में दिखता है, कम रन, सही लाइन, सही लेंथ।
क्या नियम इजाजत देते हैं?
आईसीसी के नियमों के अनुसार कोई भी गेंदबाज़ दोनों हाथों से गेंदबाज़ी कर सकता है। बस एक शर्त है, हाथ बदलने से पहले अंपायर को बताना होगा और ओवर के बीच बिना सूचना हाथ नहीं बदला जा सकता। मतलब साफ है कि हुनर की आज़ादी है, लेकिन नियमों की डोर के साथ।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उदाहरण
आधुनिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में श्रीलंका के कामिंदु मेंडिस ऐसे सबसे चर्चित खिलाड़ी हैं, जो नियमित तौर पर दोनों हाथों से स्पिन गेंदबाज़ी करते हैं, लेफ्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स भी और राइट आर्म ऑफ स्पिन भी। निष्कर्ष उसी राह का देसी, ज़मीनी संस्करण लगता है।
मैदान से निकलती कहानी
निष्कर्ष नेट्स में पसीना बहाने वाला गेंदबाज है। क्रिकेट में अक्सर कहा जाता है कि स्टाइल सबका होता है, लेकिन पहचान कुछ की बनती है। निष्कर्ष श्रीवास्तव की पहचान उसकी वही दो हथियारों वाली गेंदबाज़ी है।