- फुटबॉल टीम चयन, प्रमाणपत्र वितरण और जर्सी विवाद को लेकर खिलाड़ियों की शिकायत
- चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर उठे सवाल, मुख्यमंत्री पोर्टल पर जांच के निर्देश, जांच अधिकारी पर भी आपत्ति
- किट व जर्सी में नियम उल्लंघन के आरोप, निजी स्कूल में कोच की भूमिका पर स्पष्टीकरण की मांग
कानपुर, 14 फरवरी।
छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के खेल विभाग में फुटबॉल टीम चयन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कुछ खिलाड़ियों और संबंधित पक्षों ने लिखित शिकायतों के माध्यम से चयन प्रक्रिया, प्रमाणपत्र वितरण, किट उपयोग और कोच की भूमिका पर आरोप लगाए हैं। इन शिकायतों की प्रतियां कुलपति कार्यालय, राज्यपाल कार्यालय तथा मुख्यमंत्री पोर्टल पर भेजी गई हैं।
चयन प्रक्रिया पर विवाद
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से फुटबॉल टीम चयन में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। उनका कहना है कि ट्रायल और अंतिम चयन सूची के बीच अंतर देखने को मिला। कुछ मामलों में यह भी आरोप है कि प्रतियोगिता में खेलने वाले खिलाड़ियों और प्रमाणपत्र पाने वाले खिलाड़ियों के नाम अलग-अलग रहे।
साल 2024 में आयोजित सेंटर जोन और ऑल इंडिया स्तर की प्रतियोगिताओं के संदर्भ में भी आरोप लगाए गए हैं कि चयन प्रक्रिया में निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले को फर्जी करार दिया गया है।
दूसरी तरफ शिकायकर्ता ने 2025-26 सत्र के सेंटर जोन फुटबॉल टूर्नामेंट के लिए टीम चयन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत के अनुसार, ट्रायल तीन बार आयोजित किए गए, जिनमें से एक निर्धारित तिथि पर ट्रायल नहीं हो सका। आरोप है कि चयन समिति द्वारा अनुशंसित खिलाड़ियों के अतिरिक्त अन्य खिलाड़ियों को भी टीम में शामिल किया गया।
मुख्यमंत्री पोर्टल पर जांच
इन शिकायतों पर मुख्यमंत्री पोर्टल के माध्यम से संज्ञान लिया गया है और जांच के निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रारंभिक जांच उन्हीं अधिकारियों को सौंपी गई जिन पर आरोप लगे हैं। इस पर दोबारा आपत्ति दर्ज कराई गई है और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारियों में देरी को लेकर भी असंतोष जताया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि निर्धारित समय सीमा के बाद भी पूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
किट और जर्सी को लेकर सवाल
एक अन्य आरोप विश्वविद्यालय की फुटबॉल टीम की जर्सी पर निजी संस्थान का लोगो प्रदर्शित किए जाने को लेकर है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि एआईयू (AIU) के नियमों के अनुसार विश्वविद्यालय की आधिकारिक किट पर केवल स्वीकृत लोगो ही लगाया जा सकता है। यदि किसी प्रकार का विज्ञापन किया जाता है तो उसकी विधिवत अनुमति और प्रक्रिया आवश्यक होती है। इस मामले में भी प्रशासन से स्पष्टीकरण की मांग की गई है।
कोच की भूमिका पर प्रश्न
कुछ खिलाड़ियों ने यह भी आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय से संबद्ध एक कोच निजी स्कूल में नियमित रूप से प्रशिक्षण दे रहे हैं। इस संबंध में विश्वविद्यालय की सेवा शर्तों और अनुमति प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि इस विषय में विश्वविद्यालय की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
निष्पक्ष जांच की मांग
इन सभी आरोपों के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार है। खेल विभाग से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक माना जाता है, विशेषकर तब जब यह छात्रों और खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़ा हो।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनके पास दस्तावेजी साक्ष्य हैं, जिन्हें संबंधित प्राधिकरणों को उपलब्ध कराया गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच किस स्तर पर और कितनी निष्पक्षता से आगे बढ़ती है।
फिलहाल यह मामला विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और खेल प्रशासन की पारदर्शिता को लेकर गंभीर चर्चा का विषय बना हुआ है।